Published On : Fri, Mar 14th, 2014

साकोली : असफल रही राजीव गांधी ग्रामीण निवास योजना

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P1010718साकोली – ग्रामीण क्षेत्र में आर्थिक दृष्टी से कमकुवत लोगों को विकास सेवाए उपलब्ध कराने के उद्देश से राज्य सरकार की ओर से राजीव गांधी निवास योजना टप्पा – २ सन २००८ में शुरू की गई थी। परंतु यह उद्देश सफल बनाने में बैंक व जिल्हा अधिकारियों की तानाशाही बीच में आने से इस योजना को सफल बनाने में प्रश्नचिन्ह लगा है।

सरकार की राजीव गांधी ग्रामीण निवास योजना टप्पा – २ की २६ अगस्त २००८ से शुरू हुई इस योजना का लाभ लेने वाले लाभार्थीयों को जिला ग्रामीण विकास यंत्रणा के माध्यम से बैंक की ओर से १ लाख रूपये कर्ज दिया जाता है। इसके लिए ग्रामपंचायत के उपलब्ध करवा दिए या खुद की २५० चौ. फीट जमीन पर बांधकाम करना है। प्रति घरकुल निर्माण के लिए ९० हजार रु. लाभार्थी को बैंक की ओर से १० साल के लिए २ प्रतिशत ब्याज के दर से राशि उपलब्ध करायी दी जानी है। इसके लिए लाभार्थी ने प्रथम सहभाग के लिए १० हजार रूपये बैंक में जमा करने पड़ते है। इसके बाद उठाए गए कर्ज की प्रति माह ८३३ रूपये रक्कम भरनी होती है। कर्ज वापसी की हमी के लिए लाभार्थी के ओर से बैंक को जमीन धारण करनी पड़ती है। यह रक्कम लाभार्थी को दो भाग में उपलब्ध कर दी जाती है।निवासी निर्माण करते समय ४० हजार रूपये का प्रथम व ५० हजार रूपये का दूसरा हप्ता दिया जाता है।  इस निर्माण पर जिला विकास यंत्रणा के अधिकारियों का नियंत्रण रहता है। सरकार की ओर से ब्याज दर में कर्ज उपलब्ध होने से और उसकी वापसी १० साल के अवधी में होने से गरीब, सामान्य लोगों के निवास के लिए सपने पुरे होने की मदत मिलती है। इस योजना का लाभ लेने का प्रमाण ग्रामीण इलाके में अधिक है क्योकि हर एक व्यक्ति को लगता है की खुद का अच्छा मकान हो इसी उद्देश को सामने रख सभी कागजादों की पूर्तता करके इस योजना का लाभ लेने राज्य के अनेक लाभार्थियों ने गोर गरीब लाभार्थियों ने बांधकाम को शुरुवात की।

P1010717घर निर्माण के लिए प्रथम हप्ता ४० हजार रूपये मिलने से जोरशोर से बांधकाम को शुरुवात हुई परंतु प्रथम हप्ते की रक्कम खर्च होने के बाद और आधा बांधकाम पूरा होने के बाद जब लाभार्थी दूसरे हप्ते के लिए बैंक पहुचा तो उन्हें पहले बांधकाम पूरा करो तब रक्कम मिलेगी ऐसी सुचना दी गई। इस योजना के लाभ के लिए सरकार ने पहले पूरा बांधकाम करों बाद में रक्कम मिलेगी ऐसा उल्लेख नहीं किया है। जब की लाभार्थी को १० हजार रुपये की रक्कम कम जाती होगी तो उन्होंने जमा किये १० हजार रूपये ब्याजदर आकारणी कर देने की सुचना दी गई है। लेकिन संबंधित अधिकारी गरीबो से कमाई करने के लिए उनकी रक्कम रोकने की बात की जाती है। ऐसे प्रकार को ध्यान देते हुए विभागीय आयुक्त ने संबंधित अधिकारियों को सुचना दी की कोई भी लाभार्थी इस योजना से वंचित न रहे। लेकिन जिला ग्रामीण विकास यंत्रणा के अधिकारियों ने इस योजना असफल बनाने में अपनी ही प्रगती की है।

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सरकार ने सन २०१० तक ठाणे जिला ११,००० , रायगड ४१८२, रत्नागिरी २६९८० , सिंधुदुर्ग १८६०, नाशिक ६९८७, घुले २९१५, जलगाव ८९५५, अहमदनगर ९०२०,नंदुरबार २९३०, पुणे ७६८२ , सोलापुर १११४२, कोल्हापुर ३६१३३, सांगली ४२०४, सातारा ३६९०, अमरावती २६२४, यवतमाल ३०६०, अकोला १३८०, बुलढाणा २६०५५ , वाशिम ७५८ , औरंगाबाद ४३०७, उस्मानाबाद २१७४, परभणी १४८८, बीड ३२०८, जालना २०८०, नांदेड़ ४९२०, हिंगोली ८७३, लातूर २२६७, भंडारा १४३८, वर्धा १८५८ , गोंदिया १२२५ ऐसे कुल १ लाख २४ हजार घरकुल के उद्दिष्टे रखे जाए तो. परंतु अधिकारियों के तानाशाही से यह उदिष्टे आज तक पुरे नहीं हुए।

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