नागपुर- सरकार का शपथविधि को कई दिन हो चुके है । लेकिन अब तक मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हुआ है । तीन पार्टियों के विसंवाद के कारण कौन सा विभाग किसके पास रहेगा। इसको लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है । मंत्रियो को बांटे गए विभाग यह अस्थायी है । ऐसा खुद ज्येष्ठ मंत्री ने ट्वीट के माध्यम से कहा है । जिसके कारण अब सवाल सामने आ रहा है की किस्से प्रश्न पूछे जाए, कौन उत्तर देगा, उत्तर देने के बाद वह विभाग उनके पास रहेगा की नहीं, उत्तर का दायित्व वह स्वीकारेंगे की नहीं। ऐसे अनेक सवाल इस सरकार के बनने के शुरू हो गए है । भरपूर समय मिलने के बाद भी मंत्री मंडल का विस्तार नहीं किया गया है । इसका अर्थ ऐसा है की नागपुर अधिवेशन को लेकर सरकार गंभीर नहीं है । यह कहना है पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का. वे रविवार 15 दिसंबर को विरोधी पार्टी की सरकार को लेकर अपनी भूमिका स्पष्ट कर रहे थे। इस दौरान भाजपा नेता चंद्रकांत पाटिल, विनायक मेटे, गिरीश महाजन, राधा कृष्ण विखे पाटिल समेत अन्य नेता मौजूद थे।
इस दौरान फडणवीस ने कहा की यह सरकार केवल कागजी अधिवेशन इसे बना रही है। यह सरकार आने के बाद बेमौसम बारिश से ग्रस्त किसानों को मदद मिलेगी। ऐसी अपेक्षा की जा रही थी। हमारी सरकार थी तो मंत्रिमंडल के माध्यम से 10 हजार करोड़ रुपए के निधि को मान्यता दी थी। आकस्मिता निधि बढ़ाने के संदर्भ में,अध्यादेश निकालने को लेकर मान्यता दी थी। उस दौरान यह बताया बताया गया था की यह केवल आकस्मिकता निधि है आगे और इसकी निधि को बढ़ाया जाएगा। राज्यपाल ने हेक्टरी आठ हजार और 18 हजार रुपए ऐसी प्रकार की घोषणा कर उसका निर्णय भी लिया था । लेकिन यह सरकार आने के बाद अब तक उस संदर्भ में कोई भी निर्णय नहीं लिया गया।
मुख्यमंत्री ने हमेशा मांग थी की 25 हजार रुपए हेक्टर किसानों को मदद मिलनी चाहिए। इस सरकार के कुछ नेताओ ने 35 हजार रुपए की मांग की है। किसी ने 50 हजार रुपए भी मांगे है। एक ज्येष्ठ नेता ने तो कैलकुलेशन कर डेढ़ लाख रुपए की भी मांग की है। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने सीधे सीधे किसानों के लिए कोई शर्त न रखते हुए 25 हजार रुपए हेक्टर की और 50 हजार रुपए बगाईती की मांग की थी । हमारी मांग है की मुख्यमंत्री ने जो मांग की थी कम से कम उसको पूरा किया जाए। लेकिन सरकार की इतनी बैठके हुई लेकिन बेमौसम बारिश और किसानों की चर्चा तक नहीं की गई और नाही निर्णय लिया गया ।
93 लाख हेक्टर फसल का नुकसान हुआ है। 23 हजार करोड़ रुपए किसानों को जिनकी फसल बारिश से खराब हुई उन्हें तत्काल मदद करनी चाहिए। इसपर सरकार ने अब तक कोई निर्णय नहीं लिया है । हम केवल सरकार को यह याद दिलाएंगे की आप ने जो किसानो को मदद करने की बात कही थी। उसे पूरा करे।
तीनो ही पार्टियों ने कर्ज माफ़ी की घोषणा की थी और सात बारा कोरा करने की मांग की थी । किसानो की संपूर्ण कर्जमाफी और सात बारा कोरा कब होगा। सरकार को यह भी बताना चाहिए।
यह सरकार स्थगति सरकार है । हरएक काम को स्थगति देने के काम किया जा रहा है । महाराष्ट्र ठप्प है । क्योंकि जिन्हे पैसे दिए गए थे, जिनका टेंडर हो चूका था। ऐसे कामों को भी स्थगति देने के कारण महाराष्ट्र में असंतोष फ़ैल गया है। ग्रामीण भाग और शहरी भाग में अगर सरकार रिव्यु लेना चाहे तो ले सकती है। लेकिन यह स्थगति ऐसी ही रहेगी क्या, पैसा वापस लेगी क्या, जनता को दिए आश्वासन वापस लेगी क्या। ऐसे कई सवाल सामने आ रहे है। स्थगति से जनता में रोष तो है ही इसका असर महाराष्ट्र की प्रतिमा पर भी हो रहा है । इसका परिणाम इन्वेस्टमेंट पर हो रहा है ।
सावरकर के बयान पर राहुल गांधी को माफ़ी मांगने की मांग भी फडणवीस ने की है। उन्होंने कहा की देश की जनता को सावरकर के बलिदान की गाथा पता होनी चाहिए। उन्होंने सावरकर पर शिवसेना के रुख पर भी ऐतराज जताया।