Published On : Fri, Jun 12th, 2020

एनसीपी में निष्ठवानों को नहीं दी जा रही तवज्जों

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बाहरी सतीश पेंदाम को एमएलसी बनाने को आतुर सुप्रीमो

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नागपुर – भाजपा की राह पर एनसीपी कदमताल कर रही। इससे एनसीपी के निष्ठावान कार्यकर्ता,पदाधिकारी सिरे से नाराज नज़र आ रहे। क्योंकि सतीश पेंदाम जो एनसीपी से रत्तीभर ताल्लुक नहीं रखता,उसके अनुसार एनसीपी सुप्रीमो उन्हें राज्यपाल कोटे से एमएलसी बनाने को आतुर हैं, जिसकी भनक लगते ही पक्ष में रोष देखा जा रहा।

याद रहे कि एनसीपी सुप्रीमो ने ऊर्जावान व निष्ठावान कार्यकर्ताओं को न सिर्फ राजनैतिक बल्कि आर्थिक रूप से मजबूती दी। इससे पक्ष हमेशा से ही मजबूत रहा। पिछले कुछ सालों से सत्ता से महरूम रहने के बावजूद निष्ठावान कार्यकर्ता न सिर्फ पक्ष से जुड़े रहे बल्कि पक्ष को मजबूती प्रदान की। अब जब लाभ मिले की बारी आई तो पक्ष ने अपने निष्ठावान कार्यकर्ताओं को दरकिनार कर बाहरी लुभावने सख्स पर दांव खेलने की रणनीति बना रही। पक्ष की इस नीत से पक्ष को चौतरफा नुकसान देखने को मिल सकता हैं।

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क्या गजभिए की जगह पेंदाम को मौका देंगे एमएलसी के पहले कार्यकाल से सेवानिवृत्त हो चुके गजभिए को पक्ष दोबारा मौका देने के मूड में नहीं, पेंदाम समर्थक दावा कर रहे कि गजभिए से पक्ष को फायदा नहीं हुआ। इसलिए पेंदाम को उसकी जगह मौका देंगे,जो किसी भी पक्ष से लंबे समय तक जुड़ा नहीं, चुनाव दर चुनाव एक सोची समझी राजनीत के तहत चाल चली और पहली मकसद पूर्ण होने के बाद दूसरे बड़े मकसद को पूर्ण करने में भिड़े लेकिन उस पक्ष से जुड़े नहीं, इसलिए आजतक कोई राजनैतिक लाभ नहीं मिल पाया। वहीं प्रकाश गजभिए एक चर्चित नेता रहे,पक्ष के साथ आज भी बने हुए हैं, इसके अलावा ईश्वर बालबुधे आदि काफी सक्रिय रहे,जिसका परिणाम भी पक्ष हित मे रहा। रमेश बंग,राजेन्द्र जैन आदि भी पक्ष के निष्ठवानों में गिने जाते हैं।

अब सवाल यह हैं कि क्या एनसीपी सुप्रीमो की दूरदृष्टि कम हो गई,क्या एनसीपी में निष्ठवानों को नजरअंदाज करना शुरू कर दिया या फिर एनसीपी में आदिवासी नेतृत्व पर भरोसा नहीं। दूसरी ओर यह भी कड़वा सत्य हैं कि पेंदाम जैसे बाहरी को शीर्ष पर बैठने से एनसीपी के मंसूबा पूर्ण नहीं होंगा क्योंकि वह एनसीपी की राष्ट्रवादी चादर को कभी ओढ़ नहीं पाएगा।

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