Published On : Mon, Dec 15th, 2014

यवतमाल : तलेगांव (भारी) में किसानों का चक्काजाम सफल

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कृषिमूल्य आयोग रद्द करें, पैकेज नहीं चाहिए, फौरन सहायता देने की मांग

Rastaroko
यवतमाल।
आज यवतमाल-पांढरकवड़ा मार्ग पर तलेगाव (भारी) में किसानों का चक्काजाम आंदोलन सफल रहा. जिससे वाहनों की यवतमाल और पांढरकवड़ा की ओर लंबी कतारे देखी गई. 25 से 30 गाव के किसानों ने उत्स्र्फूत रूप से इस आंदोलन में शामिल होकर यह आंदोलन किया. उन्होंने कृषिमूल्य आयोग यह किसान विरोधी होने के कारण उत्पादन खर्च के आधार पर उसके दाम तय नहीं करता, जिससे किसान आत्महत्या हों रही है, ऐसा आरोप किया. इसके साथ ही इस आयोग को रद्द करने की मांग के साथ पैकेज नहीं चाहिए, फौरन सहायता राशि देने की मांग सैकड़ों किसानों ने की. किसानों का दुश्मन यह आयोग बरखास्त करें और कृषि उपज के दाम ठहराने के लिए सक्षम वैकल्पिक यंत्रणा बनाए. जिसमें किसानों के प्रतिनिधि का समावेश हों, ऐसी मांग भी की गई.

कब होगा 7/12 कोरा
भाजप और शिवसेना की युवती सरकार ने लोकसभा और विधानसभा चुनाव में किसानों से वादा किया था, अगर उनकी सरकारी राज्य और केंंद्र में बनती है तो वे सभी किसानों का 7/12 कोरा करेंगे. यानी सभी फसल कर्ज माफ करेंगे. इसके साथ ही लागत और 50 फिसदी मूनाफा का फामूला अपनाएंगे. मगर अब सत्तासिन होते ही केंद्र की मोदी सरकार और राज्य की फडणवीस सरकार यह वादा भूल चुकी है, जिससे किसान बड़े पैमाने पर आत्महत्या कर रहें है. खरीफ मौसम में वर्षा के विलंब आने से यह फसल चौपट हो गई थी. प्रति हेक्टेयर क्ंिवटल से आनेवाला उत्पादन किलो से आने के कारण किसान परेशान हो गया. कपास के उत्पादन में भी भारी कमी आयी है. इसके साथ ही वैश्विक मंदी का कारण बताकर कपास को सिर्फ 4 हजार 50 रुपए का गैरंटी मूल्य भी व्यापारी नहीं दें रहे है. तो दूसरी ओर सरकारी कपास खरीद शुरू नहीं हो पाई है. जिससे पैकेज की मलहमपट्टी किसानों को ना बहलाए अब सिर्फ फौरन सहायता राशि घोषित करने की मांग की गई है. किसानों को प्रति हेक्टेयर 30 हजार रुपए सहायता राशि फौरन देने की मांग की गई है.

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आज रास्ता रोको आंदोलन में अशोक भुतड़ा, दत्ता चांदोरे, मोरेश्वर आदमने, परसराम पारधी, सुभाष पातालबंसी ने उपस्थित सैकड़ों किसानों को मार्गदर्शन
किया. किसीभी सुरत में अपना संयम न खोते हुए आत्महत्या जैसा निर्णय ना लेंं, रास्ता निकलेंगा ऐसा आवाह्न भी किया.

किसानों की मुख्य मांगे
कृषिपंप का कनेक्शन फौरन जोड़े, सुबह 8 से शाम 5 बजे तक 9 घण्टे उचित दबाव की बिजली आपूर्ति करें, किसानों को बिजली मुफ्त दें, सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराए, कृषिमूल्य आयोग ने तय किए कपास और सोयाबीन केे गैरंटीमूल्य में 50 फिसदी वृद्धि करें, अकालग्रस्त किसानों को जितने हेक्टेयर पर बुआई की है उतने प्रति हेक्टेयर 30 हजार मुआवजा दें, किसानों को प्रति एकड़ 35 हजार रुपए फसल कर्ज दें और बैंक में 10 लाख तक का ही खेत गिरवी रखें. 1979 से कपास पर 22 फिसदी बोनस देकर कपास खरीद शुरू करें, अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल और पेट्रोलजन्य पदार्थों के मूल्य कम हुए है तब रासायनिक खाद की किंमत कम करें, मोदी द्वारा दिया गया लागत और 50 फिसदी मूनाफें के फामूल्यें पर अमंल करें, सात/बारा कोरा करें, खरीफ फसल के बीमा मुआवजा किसानों के खाते में जमा करें, स्वामीनाथन समिति की सिफारीश से मंजूर करें, इस आंदोलन में आनंदा नागपुरे, महिपाल प्रधान, अरुण जाधव, संदीप गोधने, ब्रिजेश शुक्ला, मुलराज सोमवंशी, जे.के कोठडिय़ा, सचिन मोरघड़े, सदाशिव देशपांडे, नितिन मोरघड़े, रामदास काकाणी, मोतीराम गावंडे, प्रदीप लांडगे, गणपत काकड़े, मोहन ढोरे, वसंत दोंदल, गोविंद राठोड़, सुरेश डुकरे, मोरेश्वर आदमने, सचिन मोरघडे, वसंत दोंदल, अरविंद हटवार, विनय पाटील, गजानन नागरगोजे, विनोद देशमुख, फत्तेेअली शेख, मारोतराव मंदिलवार, विजय पाटिल, किरण बोरकर आदि के सैकड़ों किसान और भाई और बहनें उपस्थित थे. शांति के मार्ग से यह आंदोलन करते हुए किसानों की मांगे सरकार तक पहुंचाई गई, ऐसी जानकारी अशोक भूतड़ा और दत्ता चांदोरे ने दी है.

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