Published On : Tue, Nov 19th, 2019

कैमरा ट्रैप : आखिर मिहान में दिखा टाईगर

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नागपुर: मिहान स्थित इन्फोसिस के कैम्पस के पास लगाए गए कैमरा ट्रैप में आखिर बाघ नजर आ गया. पिछले 2 दिनों से यहां रात के समय बाघ दिखाई देने की चर्चा चल रही थी. इसे लेकर मिहान में काम करने वाले कर्मचारियों सहित आसपास के गांवों के लोगों में डर बैठा हुआ था. बताया जाता है कि रविवार रात 10.15 बजे के दौरान बाघ की इमेज आई. इससे यह तय हो गया कि परिसर में बाघ घूम रहा है. वन विभाग की ओर से उन स्थानों पर कैमरा ट्रैप की संख्या बढ़ा दी गई जहां बाघ के पंजों के निशान दिखाई दिए हैं. वन अधिकारियों और कर्मचारियों की गश्त भी बढ़ा दी गई है.

हिंगना, फेटरी, दहेगांव और वड़गांव परिसर में अगस्त में एक बाघ नजर आया था. अब मिहान परिसर में बाघ का नजर आना चर्चा का विषय बन गया. बाघ इन्फोसिस और टाटा एयरोनाटिक्स लि. के बीच के भाग में नजर आया था. वहां घनी झाड़ियों के साथ ही पानी का नाला भी है. इस बाघ के हिंगना वन परिक्षेत्र से आने की चर्चा है. हिंगना और सेमीनरी हिल्स वन परिक्षेत्र के कर्मचारी बाघ की निरंतर खोज कर रहे हैं. आसपास के गांवों के नागरिकों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं.

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रविवार को परिसर में 15 कैमरा ट्रैप लगाए गए थे. इनकी संख्या बढ़ाकर 25 कर दी गई है. मिहान की आईटी कम्पनियों के सुरक्षा कर्मचारियों को दुपहिया से जाते समय बाघ नजर आया था. वन विभाग को सूचना देने के बाद छानबीन शुरू हुई. बाघ के पंजों के निशान पाए जाने के बाद यहां 15 कैमरा ट्रैप लगाए गए थे. सोमवार सुबह कैमरों की जांच करने पर बाघ का चित्र दिखाई दिया.

नागरिकों को किया सतर्क
वन कर्मचारी मिहान परिसर और आसपास के गांवों में जाकर नागरिकों को सतर्क कर रहे है. खासकर उन क्षेत्रों में जहां बाघ के पंजों के निशान पाए गए. बाघ को पुन: उसके अधिवास में भेजने पटाखे फोड़े जा रहे हैं. इस बात का भी ध्यान रखा जा रहा है कि मार्ग में किसी तरह का अवरोध तो नहीं है. उपवनसंरक्ष प्रभुनाथ शुक्ल ने बताया कि बाघ और मनुष्य में संघर्ष न हो इसके लिए परिसर में जनजागृति की जा रही है.

शिकार किए जाने की संभावना
वन विभाग के साथ बतौर टेक्निकल कंसल्टेंट काम कर रहे विनिश गुजरकर ने बताया कि बाघ 2-3 दिन से यहां डटा हुआ है. इससे संभावना है कि इसने किसी जानवर का शिकार किया हो. अपने शिकार को खाने के लिए ही वह इतने समय तक रुका हुआ होगा. बाघ का आकार भी बड़ा नजर आ रहा है. यहां काम करने वाले श्रमिकों और गांव वालों को छोटे रास्तों की बजाय मेन रोड से जाने की सलाह दी गई है.

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