नागपूर: इंदिरा गांधी ओपन यूनिवर्सिटी ( इग्नू ) की ओर से शुक्रवार को युवा अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ियों और एथिलीटो का सम्मान किया गया. जो इसी यूनिवर्सिटी में पढ़ रहे है. इग्नू के रीजनल डायरेक्टर डॉ. पी. शिवस्वरूप ने सभी का स्वागत किया और उन्हें इस दौरान डिग्रियां भी दी गई. जिसमें अशोक मुन्ने जो की ” वन लेग वंडर ऑफ़ इंडिया ” के नाम से मशहूर है वे काटोल के पास के एक छोटे से गांव मूर्ति के रहनेवाले है. पिता गरीब किसान थे और बचपन काफी गरीबी में बिता. 24 साल की उम्र में उनके साथ एक दुखद हादसा हुआ और उन्होंने अपना एक पैर खो दिया. लेकिन जब उन्होंने अपने माता पिता से लोगों को यह कहते हुए सुना की अब यह कुछ नहीं कर सकता. तब उन्होंने दो पैर वालों से कुछ और बेहतर करने की ठानी. आज वे 3 हजार किलोमीटर अपनी बाइक पर सवार होकर लद्दाख जा चुके है. आज अशोक एक पर्वतारोही, मोटररॉयडर, पैराग्लाइडर, स्कूबा ड्राइवर, मैराथन रनर, मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट, जिमन्यासिस्ट, तैराक और योग विशेषज्ञ है आज उनकी खुद की कंपनी है. उन्होंने बताया कि अपनी कमजोरी को उन्होंने कभी खुद पर हावी नहीं होने दिया . मेहनत और कड़ी लगन के बाद उन्होंने अपनी जिंदगी को सफल बनाने का लक्ष्य प्राप्त किया है. उनपर ‘ छलांग ‘ नाम की एक बॉलीवुड फिल्म भी बनाई जा रही है.
दूसरी इग्नू की छात्रा जयलक्ष्मी सरिकोंडा एक आर्चरी की खिलाड़ी है और भारत देश के साथ ही अन्य कई देशो में इंटरनेशनल चैंपियनशिप खेल चुकी है. वह इग्नू के चंद्रपुर में एम.ए पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की सेकंड ईयर की छात्रा है. जयलक्ष्मी को अब तक जिला सर्वश्रेस्ठ स्पोर्ट्समेन, विदर्भ क्रीड़ा रत्न, राज्य स्वर्ण पदक, दो बार सब-जूनियर और एक बार जूनियर नेशनल चैंपियन, दो साल के लिए नंबर 1 नेशनल रैंक , एशियन ग्रांड प्रिक्स में टीम गोल्ड, एशियन तीरंदाजी चैंपियनशिप में टीम सिल्वर, विश्व यूवा तीरंदाजी में चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज़ मेडल उसने हासिल किया है . अभी जयलक्ष्मी को सरकार की ओर से क्रीड़ा अधिकारी की नौकरी दी गई है. उसने बताया की उनकी स्कुल के टीचर कहते थे की वह कुछ नहीं कर सकती है. इसी बात से उन्होंने तीरंदाजी में मेहनत की और परिजनों ने भी उनका साथ दिया.
तीसरे विद्यार्थी और खिलाड़ी अतुल कुमार चौकसे जो की छिंदवाड़ा के रहनेवाले है. लेकिन अभी नागपुर में ही रह रहे है. वे इग्नू के बी.कॉम थर्ड ईयर के विद्यार्थी है. वह एक अल्ट्रा मैराथन रनर है. उन्होंने 257 किलोमीटर मोरक्को सहारा में भारत का प्रतिनिधितत्व करते हुए भाग लिया. कच्छ के रेगिस्तान में 161 किलोमीटर, लद्दाख में हिमालय पर्वत श्रृंखला, 18,380 फीट की ऊंचाई पर 114 किलोमीटर की स्पर्धा में अपना और अपने देश का नाम रोशन किया है. अतुल अपने ‘ नागपुर रनर अकडेमी ‘ के माध्यम से मैराथन में 30 उत्साही लोगों को भी प्रशिक्षण दे रहा है. अपने कई जगहों के अनुभव भी उसने साझा किए. उन्होंने इस दौरान इग्नू के अधिकारियों के सहयोग की भी प्रशंसा की.