Published On : Tue, Apr 12th, 2022
By Nagpur Today Nagpur News

अंधाधुंध तरीके से भूगर्भीय मैंगनीज का खनन से भुकम्प का खतरा ?

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– जलवायु व ध्वणी प्रदूषण की चपेट में कच्छीढाना- पलासपानी के आदीवासियों व जन सामान्य नागरिक हलाकान ?

नागपुर – महाराष्ट्र सीमा से लगे मध्यप्रदेश के जिला छिन्दवाडा के सौंसर तहसील अंतर्गत ग्राम कच्छीढाना-पलासपानी एवं रामपेट दमानी परिक्षेत्र में वन एवं राजस्व भूमि भू-गर्भ का अवैध तरीके एवं नियमों की धज्जियां उडाते हुए मैंगनीज अयस्क का अंधाधुंध तरीके खनन किया जा रहा है.इससे वहां पर किसी भी क्षण पर्यावरण संतुलन बिगडने से प्रकृति दैवी प्रकोप से भारी आपदाओं का खतरा उत्पन्न हो सकता है ?
आल इंडिया सोसल आर्गनाईजेशन द्वारा आदीवासियों तथा जन सामान्य नागरिकों की शिकायत के अधार पर छिन्दवाडा जिला प्रशासन एवं खनन माफिया के खिलाफ सरकार से उक्त मैंगनीज खनन से प्रभावित परिक्षेत्र का मौजमापन करवाने तथा अंधाधुंध तरीके भूगर्भ का खनन के खिलाफ कठोर कार्यवाई की मागं की है ?

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खनन पट्टा धारक फर्म को ब्लैकलिष्ट करने की मांग
पता चला कि विगत 20 साल पूर्व बांन्द्रा पूर्व मुंबई की मेसर्सः कृष्णापिंग फेरो अलाएस लिमिटेड को छिन्दवाडा जिले के सौंसर तहसील अंतर्गत ग्राम कच्छीथाना – पलासपानी परिसर की राजस्व वन भूमि पर 54.129 हेक्टेयर के भूभाग मे मैंगनीज अयस्क खदान खनन के लिए पट्टा लीज तथा परमिट दिया गया था ताकि फर्म पदाधिकारियों और संचालक सदस्यों तथा फर्म के बेरोजगार श्रमिकों को रोजगार से जोडा जा सके ? परंतु उक्त कंपनी प्रबंधन ने जिलाधीश छिन्दवाडा,खनन अधिकारी,SDO,तहसीलदार सौंसर एवं वन विभाग की सांठगांठ के तहत अपने अधिकार क्षेत्र से लागकर अतिरिक्त वन राजस्व विभाग की भूमि पर अवैध अतिक्रमण कर लिया और जरुरत से अधिक अंधाधुंध तरीके भूगर्भ की खुदाई कर दिया गया है ?

सूत्रों की माने तो विगत फरवरी 2016 मे मध्यप्रदेश शासन प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तरफ से उक्त मैंगनीज पट्टा धारक कंपनी मेसर्सः कृष्णापिंग फेरो अलाएस लिमिटेड पर आवश्यक कार्यवाई की गई थी ?

जिसका छिन्दवाडा जिला एवं सत्र न्यायालय मे मामला न्यायप्रविष्ट है ?
जिसमे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 8 सूत्रीय शर्तें रखी है!जिसे कडाई से पालन करने के निर्देश दिये गये है?परंतु उक्त खनन पट्टा धारक कंपनी नियमों की धज्जियां उडाते हुए अंधाधुंध तरीके भूगर्भ का खनन करके सरकार को करोडों का नुकसान पंहुचा रही है ?

तत्संबंध मे आल इंडिया सोसल आर्गनाईजेशन द्वारा उक्त खनन परिक्षेत्र ग्राम कच्छीढाना-पलासपानी का दौरा किया तथा मैंगनीज खनन से प्रभावित आदीवासियों तथा जन सामान्य नागरिकों ने हकीकत से अवगत करवाया? कारनामों के आसलियत का पर्दाफास हुआ है ?

कि तत्संबंधित विभाग के संबंधित और जिम्मेदार अधिकारियों ने खनन माफिया फर्म प्रबंधन को खनन पट्टा और लीज मंजूर करने के पूर्व वहां वन परिक्षेत्र मे विचरण कर रहे विविध प्रजाति के हजारों-लाखों वन्य प्राणियों को अन्यत्र आरक्षित विहंगम वन परिक्षेत्र में स्थानांतरण व पुनर्वसन किये बिना अंधाधुंध तरीके भूगर्भ का खनन शुरु कर दिया गया है ?

नतीजतन वहूमूल्य राष्ट्रीय खनिज संपदा के लालच मे वन्यप्राणियों एवं पशू पक्षियों की जीवन लीला समाप्त कर दी गई य उपरोक्त वन्यप्राणियों के शिकार की तस्करी और स्मगलिंग की जा चुकी है ?

इसके अलावा वन परिक्षेत्र मे लगी लाखों करोडों रुपये कीमत की वन संपदा जिसमे इमारती और उपजाऊं लकडियों के पेड पोधों की ई-निविदा ठेका आमंत्रित किये बिना वन परिसर को भारी और वजनी मशीनरियों के जरिये वहूमूल्य वन संपदा को नेस्तनाबूत कर दिया गया ?

खनन मशीनरियों के जरिये वन संपदा को नेस्तनाबूत कर दिया गया है ?

परिणातः सरकार को करोडों रुपये के राजस्व का नुकसान पंहुचायाजा चुका है ? वन ग्राम कच्छीढाना पलासपानी के आदीवासियों तथा जन सामान्य नागरिकों की माने तो उक्त भूमि पर चारागाह भूमि पर अवैध अतिक्रमण करके अवैध उत्खनन कर दिया गयाl नतीजा वहां के पालतू जानवरों मवेशियों तथा जंगली जानवरों को चारा घास के लिए दरदर भटकना पड रहा है.

राजीव गांधी डैम नष्ट होने से पेयजल का अकाल
आदिवासी नागरिकों के मुताबिक विगत 2002-2003 मे मध्यप्रदेश शासन द्वारा वहां पर राजीव गांधी स्टाप डैम का निर्माण कार्य करवाया गया था ताकि वहां के नागरिकों को पेयजल मुहैया कराया जा सके और पालतू जानवरों मवेशियों तथा जंगली जानवरों को पीने के लिए भरपूर मिलता रहे ?
परंतु उपरोक्त खनन माफिया फर्म प्रबंधन द्वारा छिन्दवाडा जिला प्रशासन की निस्क्रियता आडे आने की वजह से उक्त डैम जलाशय भूमि के रिकार्ड मे हेराफेरी करके जबरन कब्जा कर लिया गया और खनन मशीनरियों के जरिये डैम को नेस्तनाबूत कर दिया गया ?

नतीजतन वहां के नागरिकों को पेयजल की समस्या सताए जा रही है ?
तथा वहां के पालतू जानवरों मवेशियों तथा जंगली जानवरों को पीने के पानी के लाले पड गये है ?
इतना ही नही मैंगनीज अयस्क खदान से प्रभावित कच्छीढाना पोस्ट पलासपानी ग्राम की सुरक्षा के लिए खदान सीमा के आसपास चारों तरह चार दीवार का निर्माण नही किया गया है ?

इसके अलावा मैंगनीज से 200 फुट दूरी पर चौतरफ पक्की सडक निर्माण खनन पट्टा धारक कंपनी की तरफ से किया जाना चाहिये था ?
वहां किसी भी क्षण नागरिकों तथा पालतू जानवरों मवेशियों तथा जंगली जानवरों को खाईनुमा खदान मे गिरने और मरने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता है ?

पर्यावरण हानी और प्रदूषण का खतरा
मैंगनीज अयस्क खदान से प्रभावित कच्छीढाना पोस्ट पलासपानी त सौंसर जिला छिन्दवाडा मे ध्वणी तथा जलवायू प्रदूषण अपनी सीमा लांघते चुका है?मैंगनीज अयस्क की विशैली धूल के कण हवा मे उड उडकर नागरिकों के स्वास्थ्य संकट पर उत्पन्न हो जा रहा है ?

आदीवासियों के तर्कसंगत आरोप के मुताबिक जिला प्रशासन के अधिकारियों को वातानुकूलित निवास सुविधाएं और जरुरत से अधिक वेतनमान उपलब्ध करवाया जा रहा है ? और दूसरी तरफ यहां के बेदाग, निर्दोष और निरपराध आदिवासियों और जन सामान्य नागरिकों को भुखमरी बेरोजगारी और आवास सुविओं से वंचित रखा जा रहा ? क्यों न इस प्रकरण की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के माध्यम से मामले की संपूर्ण जांच-पडताल की जपानी चाहिये ताकि नियमों की धज्जियां उडाने वाले दोषियों की रुह कांपने लग जाए ?

उधर खनन माफिया द्वारा नियमों का खुल्लम खुल्ला उलंघन करके फर्जी दस्तावेज के अधार पर भूमि पट्टा,परमिट एवं लीज की समयावधि बढा दी गयी है ? नतीजतन अवैध उत्खनन और खनिज ढुलाई की वजह से से पर्यावरण पृथ्वी संतुलन बिगडने से किसी भी क्षण वहां पर प्रकृति दैवीय आपदाओं का खतरा उत्पन्न हो सकता है ?

पर्यावरण के लिए घातक है अंधाधुंध खनन
अंधाधुंध खनन पर्यावरण के लिए घातक सिद्ध हो रहा है। खनन की वजह से उडऩे वाली रेत शुद्ध वायु को दूषित करती है। इसका प्रभाव मानव जीवन तथा पशु-पक्षियों पर पड़ता है। रेत के कण हमारे फेफड़ों और आंखों में पहुंच जाते हैं। इससे नई-नई बीमारियां शरीर को घेर लेती है। खाने में प्रयोग में किए जाने वाले बारूद से मलबे के ढेरों के कारण वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी होती है। अंधाधुंध खनन के कारण ही आज कच्छीढाना पोस्ट पलासपानी तहसील सौंसर जिला छिन्दवाडा मध्यप्रदेश की राजस्व वन भूमि खोखली होती जा रही है। मैंगनीज खनन के नाम पर जंगल पहाड़ों की बलि दी जा रही है। इससे कई वन्य जीवों की प्रजातियां विलुप्ति की कगार पर हैं। अत्यधिक खनन से भूमि कटाव, धूल और नमक से भूमि के उपजाऊपन में परिवर्तन, जल का खारा होना,समीपस्थ क्षेत्रों और वन्य क्षेत्रों में शोर जैसी समस्याएं पर्यावरण के लिए चिंता का विषय है। अयस्क अथवा खनिज खानों से निकलने वाले मलबे में नुकसानदेह रासायनिक तत्व होते हैं, जिससे जल प्रदूषण बढ़ता हैं।

अंधाधुंध खनन का पर्यावरण पर क्या असर हो रहा है ?
अंधाधुंध खनन का प्रभाव हमारे पर्यावरण पर प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष दोनों ही रूपों में पड़ रहा है। खनन के कारण निकलने वाले रेत के कण हवा में उड़ कर वातावरण को प्रदूषित करते हैं। इन सूक्ष्म कणों के हवा में फैलने के कारण इसका असर मानव जीवन पर भी पड़ रहा है,क्योंकि सूक्ष्म कण सांस लेने पर हमारे शरीर के अंदर चले जाते हैं। इससे श्वास तथा फेफड़े संबंधी अनेक बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। खुले वाहनों में रेत भरकर ले जाने के कारण ये कण उड़ कर आंखों में चले जाते हैं,जिससे आंखें जख्मी हो सकती हैं। साथ ही इन वाहनों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। अवैध खनन के कारण भूगर्भ जल पर भी संकट आ गया है तथा जल प्रदूषित हो रहा है। सरकार को अवैध खनन के कारोबार को रोकने के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।

कानूनों का पालन सख्ती से हो
देश भर मे अनेक निर्माण कार्यों के चलते बालू रेत की अत्यधिक आवश्यकता महसूस होने लगी है। इसकी आपूर्ति के लिए नदियों से अंधाधुंध रेत और अन्य खनिज संपदा का खनन धड़ल्ले से किया जा रहा है। ये रेत माफिया कानून का मजाक तो उड़ा ही रहे हैं साथ ही पर्यावरण को भी बड़ी चोट पहुंचा रहे हैं। अंधाधुंध खनन के प्रभाव में नदी तल का क्षरण होना,जलस्तर का कम होना जैसी स्थितियां निर्मित हो रही हैं। नदियों के लगातार घटते जलस्तर,मानव के साथ-साथ जलचरों,वन्यजीवों और जंगलों के लिए परेशानी का सबब बन रहे हैं। बालू रेत के साथ अन्य कई खनिज पदार्थों के खनन के बाद इन्हें ढोने के लिए लगी सैकड़ों गाडिय़ों की आवाजाही से भी पर्यावरण पर भी प्रभाव पड रहा है.

न्यायालयों के आदेशों की पालना जरूरी
खनन एक बहुत बड़ी समस्या है। इसको रोकना अत्यंत आवश्यक है। खनन के कारण पर्यावरण को नुकसान हो रहा है। पहाड़ों की सुंदरता खोती जा रही है, अवैध खनन की गतिविधियों को रोका जाना चाहिए। इस संदर्भ में उच्च न्यायालय व उच्चतम न्यायालय द्वारा भी कई आदेश जारी किए गए हैं, जिसकी पालना सुनिश्चित होनी चाहिए।

पर्यावरण पर दुष्प्रभाव
अंधाधुंध खनन करने से पर्यावरण पर दुष्प्रभाव पड़ रहा है। खनन की प्रक्रिया से हम पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ कर रहे हैं। कुदरत ने जो एक संतुलित वातावरण हमें दिया है, हम उसके संतुलन को खराब कर रहे हैं। इसी असंतुलन के कारण कई जीव और जंतु की प्रजातियां नष्ट हो चुकी है। कुदरत के इस संतुलन के साथ छेड़छाड़ करना हमें बहुत भारी पड़ेगा।

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