गोंदिया: महाशिवरात्रि का महापर्व साधकों को इच्छित फल, धन, सौभाग्य, समृद्धि व आरोग्यता प्रदान करता है। महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर देर रात से ही भक्तोेंं की दर्शनों हेतू कतारें लगनी शुरू हो गई। शिवभक्तों ने पिंडकेपार, नागरा, कामठा, पोंगेझरा , प्रतापगढ़ पहाड़ी , पिंडकेपार मंदिर पहुंच शीश झुकाया और मन्नतें पुरी होने की मुराद मांगी, इन प्रसिध्द मंदिरों के बाहर स्थापित आनंद मेला के विभिन्न स्टॉलों पर खान-पान, पुजा सामग्री खरीदते हुए भक्तगण नजर आए। बच्चों हेतु झूला और मनोरंजन की व्यवस्था भी अनेक तीर्थ क्षेत्रों पर देखी गई।मंदिर ट्रस्ट बोर्ड तथा स्वंयसेवी संस्थाओं की ओर से शीतलजल, चरणपादुका, प्रसाद वितरण की व्यवस्था सराहनीय दिखाई दी, किसी अप्रिय घटना से निपटने हेतू तैनात किये गये पुलिस बल, शांति व सुव्यवस्था कायम करने की कवायद में जुटे है।
प्रतापगढ़ पहाड़ी पर गूंजा, हर-हर महादेव का जयघोष
प्रतापगढ़ की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित महादेव की विशालकाय प्रतिमा एवं प्राचीन मंदिर पर आज सुबह से ही हजारों की संख्या में भक्तों की भीड़ जुटी। सौहाद्र और भाईचारे के प्रतीक इस प्राचीन स्थल पर दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं ने अमन की दुआ मांगी।
प्रतापगढ़ पहाड़ी पर आज सुबह से विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को उनके कार्यकर्ताओं ने उपस्थिती दर्ज की तथा अपने हाथों से श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण कर पुण्य कमाया।
प्राचीन आधारशिलाओं पर खड़ा है नागरा का जागृत शिव मंदिर
महाशिवरात्रि के मौके पर शिव भक्ति में सराबोर नागरा तीर्थ क्षेत्र, प्राचीन आधारशिलाओं पर खड़ा है , नागरा का सिद्ध मंदिर 11 शिवलिंगों में से एक जागृत शिवलिंग है।नागरा के भू-गर्भ जमीन से पुरातत्व विभाग को खुदाई के दौरान सैंक़डों वर्ष पूर्व प्राप्त हुआ था, जिसे बाद में जमीन से निकले प्राकृतिक शिल्पकला मंदिर के भीतर स्थापित कर दिया गया। मुख्य मंदिर प्राचीन आधारशीलाओं पर आज भी वैसे-का-वैसा खड़ा है। 45 वर्ष पूर्व नागरा तालाब के पास की गई खुदाई के दौरान पुरातत्व विभाग को एक किला एवं उसमें मौजुद कई प्राचीन शिल्पकला की वस्तुऐं मिली, नागरा का तिर्थस्थल अब पर्यटन का दर्जा हासिल कर चुका है।
मध्यकशी कामठा में है पानी में तैरता शिवलिंग
शिव भक्ति में लीन हुए श्रद्धालु, मध्यकाशी कामठा में बड़ी संख्या में पहुंच रहे है यहां महाशिवरात्रि की धूम मची हुई है।
मध्यकाशी के नाम से प्रसिध्द कामठा के शिवमंदिर में एशिया का सबसे बड़ा पानी में तैरता हुआ शिवलिंग है, जिसकी ऊचांई 78 फिट तथा चौड़ाई 40 फिट, कुल गोलाकार व्यास 90 फिट तक है। यहीं प्रसिध्द संत लहरीबाबा का आश्रम, साधना कुटिया एवं समाधी स्थल भी मौजुद है।
पिंडकेपार शिव धाम में गूंज रहे जयकारे
गोंदिया शहर से सटे पिंडकेपार शिवधाम मंदिर में आज सुबह से ही भक्तों का रैला लगा हुआ है। महाशिवरात्रि पर्व पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शनों हेतु पहुंच रहे हैं। मंदिर परिसर में खानपान के विभिन्न स्टॉल और झूले स्थापित किए गए हैं इस आनंद मेले का विधिवतशुभारंभ अतिथियों के हस्ते रिबन काटकर किया गाया ।मंदिर परिसर निकट विहिप , बजरंग दल कार्यकर्ताओं द्वारा चरण पादुका स्टाल भी लगाया गया है। इस अवसर पर प्रमुख रूप से देवेश जी मिश्रा, जिला मजदूर संघ के अध्यक्ष बंटी (सचिन) मिश्रा आदि उपस्थित थे।
रेलवे तालाब घाट वाले शिव मंदिर में हुआ रुद्राभिषेक
महाशिवरात्रि का त्योहार भगवान शिव को समर्पित है इस दिन भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
वेदों में महाशिवरात्रि पर रुद्राभिषेक को अत्यंत फलदायी माना गया हैमान्यता है कि रुद्राभिषेक करने से महादेव प्रसन्न होते हैं।
जय श्री महाकाल सेवा समिति गोंदिया के संस्थापक लोकेश ( कल्लू ) यादव की अनुशंसा पर जय श्री महाकाल महिला सेवा समिति , घाट वाले हनुमान मंदिर समिति की ओर से रेलवे तालाब टेकरी परिसर स्थित भव्य शिव मंदिर में रात 3:30 बजे से रुद्राभिषेक शुरू हुआ।विधि विधान से भगवान शिव जी की साधना की गई , इस अवसर पर उपस्थित भक्तों ने धन-धान्य , सुख सौभाग्य और समृद्धि की कामना की।रेलवे तालाब टेकरी वाले शिव जी और हनुमान जी के मंदिर मे महाशिवरात्रि के मौके पर दोपहर 12:00 बजे से महाप्रसाद का वितरण किया जा रहा है जो रात 12:00 तक चलेगा , महाप्रसाद का लाभ हजारों श्रद्धालु उठा रहे हैं।
रवि आर्य