गोंदिया। महाशिवरात्रि पर्व पर जिले के मंदिरों में लंबी कतारें लगी है बाबा भोलेनाथ के दर्शन पूजन के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है।
बता दें कि महाशिवरात्रि का दिन शिव भक्तों के लिए बेहद खास होता है यह महापर्व साधकों को इच्छित फल, धन, सौभाग्य, समृद्धि व आरोग्यता प्रदान करता है।
हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि के दिन विधि-विधान से भगवान शिव की पूजा करने पर संकटों से मुक्ति मिलने और मनोकामना पूरी होने की मान्यता है।
आज 18 फरवरी शनिवार को महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर सुबह-सवेरे से ही जिले के प्रसिध्द मंदिरों में भक्तोेंं की दर्शनों हेतू लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई।
भोलेशंकर के शिवलिंग पर धतूरा, बैलपत्र, जल, फूल, सिंदूर चढ़ाकर शिवभक्तों ने पूजा अराधना की तथा धूप, कपूर, अगरबत्ती जलाकर मंत्रोचार का उच्चारण किया।
इस दौरान शिव गीतों की स्तुति मंदिरों में गूंजती रही तथा शिव प्रेमियों द्वारा हर-हर महादेव के जयघोष का गुणगान होता रहा।
उधर प्राचीन नागरा शिव धाम मंदिर , प्रतापगढ़ तीर्थ क्षेत्र (पहाड़ी मंदिर ) , मध्यकाशी के नाम से प्रसिद्ध कामठा संत लहरी आश्रम , पोंगेझरा स्थित गायमुख मंदिर , पिंडकेपार शिवधाम इत्यादि मंदिरों में लाखों श्रध्दालुओं ने दर्शन कर शीश झुकाकर मन्नतें पुरी होने की मुराद मांगी , इन प्रसिध्द मंदिरों के बाहर स्थापित आनंद मेला के विभिन्न स्टॉलों पर खान-पान, पुजा सामग्री खरीदते हुए भक्तगण नजर आए।
बच्चों हेतु झूला और मनोरंजन की व्यवस्था भी अनेक तीर्थ क्षेत्रों पर देखी गई।
मंदिर ट्रस्ट बोर्ड कमेटियों तथा स्वंयसेवी संस्थाओं की ओर से शीतलजल, चरणपादुका, महाप्रसाद वितरण की व्यवस्था सराहनीय दिखाई दी ।
पुलिस प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा व सुरक्षा को लेकर मुकम्मल व्यवस्था की है ।
गौरतलब है कि भगवान शिव की पूजा आराधना करने के लिए वार्षिक उत्सव के रूप में धूमधाम से महाशिवरात्रि मनाई जाती है हिंदू धर्म में यह त्यौहार अंधकार और अज्ञानता पर काबू पाने का प्रतीक माना जाता है।
प्रात काल से ही शिवालयों में जलाभिषेक हो रहा है तथा महाशिवरात्रि पर्व पर शिव प्रेमी महादेव की भक्ति में रमे और रचे नज़र आए।
शिव भक्ति में सराबोर हुआ नागरा शिवधाम तीर्थ क्षेत्र
बता दें कि 11 शिवलिंगों में से एक जागृत शिवलिंग, नागरा के भू-गर्भ जमीन से पुरातत्व विभाग को खुदाई के दौरान सैंक़डों वर्ष पूर्व प्राप्त हुआ था, जिसे बाद में जमीन से निकले प्राकृतिक शिल्पकला मंदिर के भीतर स्थापित कर दिया गया।
मुख्य मंदिर प्राचीन आधारशीलाओं पर आज भी वैसे-का-वैसा खड़ा है। 45 वर्ष पूर्व नागरा तालाब के पास की गई खुदाई के दौरान पुरातत्व विभाग को एक किला एवं उसमें मौजुद कई प्राचीन शिल्पकला की वस्तुऐं, साहित्य, सिक्के, बर्तन आदि प्राप्त हुए, जिसके बाद इस विशिष्ठ परिसर को दिवारों से चुनवा दिया गया ।
अब नागरा शिव धाम यह पर्यटन का दर्जा हासिल कर चुका है।
महाशिवरात्रि पर्व को लेकर मंदिर परिसर की फूलों और आकर्षक लाइटिंग से खास सजावट की गई है देर रात से ही शिव भक्तों की दर्शनों हेतु यहां कतारें लगी है।
आयोजन की सफलतार्थ मंदिर ट्रस्ट नागरा एवं मेला कमेटी नागराधाम के रुपेश सोनू कुथे , पन्नालाल मचाड़े , सियाराम मंडाले , चमनलाल बुढ़ेकर , रंजीतसिं गौर , रमेश ढ़ेकवार , हरलाल बनोटे , बिहारीलाल लिल्हारे , शैलेश गौर , वासुदेव बान्ते , भरत लिल्हारे , राजकुमार गणवीर , किशोर बान्ते , टीटूलाल लिल्हारे , नरेश नागरीकर , घनश्याम लिल्हारे , धर्माजी पतेह आदि प्रयासरत है।
रवि आर्य