नई दिल्ली। देश एक बार फिर से कारगिल विजय दिवस को याद कर रहा है, जिसमें हमारे देश की सेना ने अपने शौर्य को दिखाते हुए पाकिस्तान की सेना को धूल चटाई थी। भारत सरकार के एक दस्तावेज के अनुसार कारगिल युद्ध के समय भारतीय सेना के निशाने पर पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ पर थे, लेकिन ये दोनों उस वक्त बाल-बाल बच गए थे।
आज जिंदा नहीं होते मुशर्रफ-नवाज शरीफ
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक भारतीय वायु सेना के एक जगुआर का अगर निशाना नहीं चूका होता तो आज नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ नहीं होते। दरअसल भारतीय वायुसेना का जगुआर जिस वक्त एलओसी पर उड़ान भर रहा था उस वक्त वह पाकिस्तान के तमाम ठिकानों पर बमबारी का टार्गेट सेट कर रहा था, जिसके बाद पीछे से आ रहे दूसरे जगुआर को पाक के इन ठिकानों पर हमला किया जाना था।
व्यापक प्रतिक्रिया के चलते सार्वजनिक नहीं की गई जानकारी लेकिन उस वक्त परवेज मुशर्रफ और नवाज शरीफ बाल-बाल बच गए जब भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमान का निशाना चूक गया और बम लेजर बास्केट के बाहर गिरा। जिस ठिकाने पर जगुआर का निशाना चूका था वहां पर शरीफ और मुशर्रफ मौजूद थे। जानकारी के अनुसार इस वाकये को इसलिए लोगों के बीच सार्वजनिक नहीं किया गया क्योंकि इसके प्रति प्रतिक्रिया काफी व्यापक हो सकती थी।
शरीफ और मुशर्रफ बाल-बाल बचे थे अंग्रेजी
अखबार की खबर के मुताबिक यह घटना 24 जून की है जब जगुआर एसीएलडीएस ने प्वाइंट 4388 पर अपना निशाना साधा और गुलटेरी को लेजर बास्केट पर चिन्हित किया, लेकिन इस ठिकाने पर बम नहीं गिरा। बाद में इस बात की पुष्टि हुई थी कि जिस जगह वायुसेना का निशाना चूका था वहां नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ मौजूद थे। दरअसल जिस वक्त पहले जगुआर विमान ने पाक के बेस को निशाना बनाया था उस वक्त वहां शरीफ और मुशर्रफ नहीं थे, लेकिन जब दूसरे जगुआर ने बमबारी की तो उस वक्त दोनों ही पाक के शीर्ष वहां मौजूद थे।
एयर कमांडर ने मना किया था बम गिराने से
हालांकि एक दूसरी रिपोर्ट के अनुसार एक एयर कमांडर एयर कमांडर उस समय में विमान के पायलट को निर्देश दिया था कि वह पाक के ठिकाने पर बम नहीं गिराए, एयर कमांडर के निर्देश के बाद पायलट ने इस विमान को भारतीय तटीय इलाके में गिरा दिया था। आपको बता दें कि भारत और पाकिस्तान के बीच मई और जुलाई में 1999 में कारगिल जिले में युद्ध लड़ा गया था। यह युद्ध उस वक्त लड़ा गया जब पाक की ओर से आतंकियों ने भारतीय सीमा में घुसपैठ की थी