नागपुर. बाजार में त्यौहारों के सीजन में कई ब्रांड आते हैं, जो ग्राहकों को सस्ते माल के चक्कर में फंसाकर ‘मिलावटी’ माल देते हैं. ग्राहक भी सस्ते माल के चक्कर में फंस जाते हैं और खुद को नुकसान पहुंचाते हैं. दिवाली के वक्त खाद्य तेलों की बिक्री लगभग दो गुनी हो जाती है. इस दौरान कई नई-नई कंपनियां ब्रांड लेकर बाजार में कूद पड़ती हैं. दिवाली के वक्त जलगांव की कंपनी केएमसी (KMC) की ओर से भी बाजार में सस्ता माल बेचा जा रहा है. अन्न औषधि प्रशासन विभाग (एफडीए) ने कुल 8 सैंपल लिए थे. कुछ दिन पूर्व सैंपलों की जांच रिपोर्ट सामने आई,जिसमें सभी सैंपल फेल (निम्न दर्जे) का पाया गया.
जानकारों ने बताया कि कंपनी के 8 के 8 सैंपल फैल हो गए हैं. मजेदार बात यह है कि 4 सैंपलों के खिलाफ जहां विभाग कोर्ट में मामला दर्ज किया है, वहीं 4 मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है. 4 मामले को तात्कालीन प्रभारी संयुक्त आयुक्त के स्तर पर ही निपटारा कर दिया गया.
माल बिक्री जारी
माल मिलावटी होने के बाद भी कंपनी का माल बाजार में धडल्ले से बिक रहा है. जानकारों ने बताया कि सैंपल फेल होने के बाद यह मान लिया जाता है कि उस बैच का माल खराब है. अन्य बैच को मार्केट में बेचने की अनुमति रहती है. इसी का लाभ लेकर कंपनियां बाजार में माल बेचते रहती है. एफडीए की ओर से दोबारा फिर जांच भी नहीं की जाती है. ग्राहकों को कैसा माल मिल रहा है यह देखने वाला भी कोई नहीं रहता है.
200-300 रुपये सस्ता रहता है माल
जानकारों ने बताया कि एेसी कंपनियां जानबूझ कर मार्केट रेट से 200-300 रुपये टीन कीमत कम रखती है ताकि लोग माल ले लें. इसी चक्कर में वे फंस जाते हैं और सेहत के साथ खिलवाड़ करते हैं. इन कंपनियों की ओर से पैकिंग को आकर्षक बनाया जाता है. यह भी ग्राहकों को खींचने का काम करते हैं.