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नई दिल्ली। असंगठित तथा निजी क्षेत्रों में काम करने वाले सभी श्रमिकों को पितृत्व अवकाश के प्रस्ताव वाला एक निजी बिल संसद के अगले सत्र में लाए जाने की संभावना है। बिल के समर्थक कांग्रेसी सांसद राजीव सातव ने कहा कि बच्चों की परवरिश माता-पिता दोनों की जिम्मेदारी है।
उन्हें अपने नवजात को समय देना चाहिए। बिल में तीन महीने तक के पितृत्व अवकाश का प्रस्ताव है।उन्होंने कहा कि इस बिल से निजी और असंगठित क्षेत्रों में काम करने वाले 32 करोड़ से ज्यादा पुरुषों को लाभ मिलेगा।
इस समय अखिल भारतीय तथा केंद्रीय सिविल सर्विसेज रूल्स के मुताबिक केंद्रीय कर्मियों को 15 दिन का पितृत्व अवकाश मिलता है। कई कॉर्पोरेट भी अपने कर्मियों को पितृत्व लाभ देते हैं।