कोरोना काल में आम नागरिकों सह रोजाना कार्यालयीन आवाजाही के लिए मनपा की आपली बसों का उपयोग किया जा सकता हैं,सिर्फ जिद्द के कारण खड़ी खड़ी बसें अधमरी हो गई
नागपुर – शहर और आसपास के गांव-छोटे नगर के लिए रक्तवाहिनी बन चुकी मनपा की आपली बसों का पिछले 6 माह से संचलन बंद कर दिया गया। इससे मनपा का राजस्व तो बचा लेकिन दूसरी ओर खड़ी खड़ी बसें की हालात जर्जर हो गई। फिलहाल इन बसों को सड़क पर दौड़ाने लायक करने तैयार करने के लिए प्रति बस लगभग 50 हज़ार से अधिक का खर्चा आना लाजमी हैं।
मनपा प्रशासन के प्रतिनिधित्व में परिवहन विभाग रोजाना 325 बसें तय मार्गो पर दौड़ा रही थी। प्रत्येक बस लगभग 200 किलोमीटर का सफर तय किया करते थे। इनमें 4 श्रेणी की बसें थी। बतौर सरकारी संपत्ति के रूप में स्टैंडर्ड बसें और इलेक्ट्रिक बसें थी,जिनकी संख्या लगभग 150 के आसपास थी। इनमें से कुछ दर्जन डीजल बसों को सीएनजी में तब्दील कर प्रदूषण रहित सेवाएं दी जा रही थी। क्योंकि इन बसों के संचलन से मनपा को आर्थिक लाभ नहीं होता था,इसलिए शहर भर और आसपास में सिर्फ सुविधा के नाम पर संचलन की जा रही थी।
कोरोना काल मार्च के तीसरे सप्ताह से शुरू हुई जो आज तक जारी हैं। इस दौरान नागरिकों सह एमआईडीसी आदि तक आवाजाही के लिए आपली बसों का इस्तेमाल किया जा सकता था। प्रवासी मजदूरों को उनके मूल गांव तक पहुंचाने के लिए विभागीय आयुक्त कार्यालय प्रशासन,जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन ने निजी बस संचालकों से नाममात्र की शुल्क पर बसें ली,इस जगह मनपा की आपली बसों का इस्तेमाल किया गया होता तो आज खड़े खड़े खटारा होते जा रही बसों से होने वाली नुकसान से बचाया जा सकता था। इसकी साफ वजह यह रही कि मनपा प्रशासन की उक्त अन्य प्रशासन से समन्वय नहीं था।नतीजा मनपा की आपली बसें आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा हैं।
याद रहे कि कोरोना के इसी काल में नागपुर छोड़ अन्य बड़े शहरों में परिवहन सेवा शुरू कर दी गई,सिर्फ मनपा प्रशासन के जिद्द के कारण आपली बस के बेड़े में शामिल सैकड़ों बसों खड़ी खड़ी कबाड़ का रूप लेती जा रही। अभी तो चक्के और बैटरी खराब हुए और यही आलम रहा तो इंजन सह अन्य कलपुर्जे जवाब देने लगेंगे।
राज्य सरकार के परिवहन विभाग ने एसटी महामंडल के बसों को नियमों का पालन करते हुए संचलन शुरू कर चुकी हैं लेकिन मनपा प्रशासन की अड़ियल रवैये के कारण उंगलियों पर गिनने लायक बसें ही दौड़ाई जा रही,शेष डिपो में खड़ी खड़ी खर्चा बढ़ा रही हैं।
उल्लेखनीय यह हैं कि मनपा की आपली बसों को शुरू करने से अन्य परिवहन सेवा की कम से कम दरकार नहीं होंगी। एमआईडीसी के अमूमन सभी उद्योग कंपनी शुरू हैं, इन तक पहुंचने के लिए निजी बसों और व्यक्तिगत वाहनों का इस्तेमाल जारी हैं, ऐसे में मनपा की आपली बस सेवा दे तो बसों को कबाड़ बनने से रोका जा सकता हैं।