Published On : Mon, Jan 3rd, 2022
By Nagpur Today Nagpur News

विकासक-आपूर्तिकर्ता को एकही तराजू में तौल बदनाम कर रही मनपा

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– SUPPLIER(आपूर्तिकर्ता) को CONTRACTOR(विकासक) बतलाकर मनपा कारोबार ठप्प करने की साजिश,मनापायुक्त राधाकृष्णन बी का अजब -गजब कारनामा

नागपुर – स्वास्थ्य विभाग के तथाकथित प्रमुख डॉक्टर चिलकर ने स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत स्टेशनरी सप्लायर की पोल खोली,इसके पीछे भी बड़ा राज होगा ? इसलिए कि इस विभाग में इससे भी बड़े बड़े घोटाले अपने शबाब पर हैं।जैसे कचरा संकलन घोटाला,सुलभ शौचालय घोटाला,सफाई कर्मी की हजारी घोटाला आदि आदि। उक्त घोटाले को छोड़ स्टेशनरी घोटाले को सार्वजनिक करना और उसे मनापायुक्त द्वारा खुद के सर पर शेहरा बांध खुद की पीठ थपथपाना यह निकृष्ठ दर्जे का प्रशासकीय पहल हैं, यह आरोप मनपा कर्मियों द्वारा ही लगाया जा रहा।

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निःसंदेह स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत ही नहीं सम्पूर्ण मनपा में स्टेशनरी और GAD अंतर्गत स्टोर विभाग में धांधली ही धांधली हो रही। लेकिन वे सभी सप्लायर हैं न कि कॉन्ट्रेक्टर। सप्लायर की भूमिका आपूर्ति तक सीमित रहती लेकिन कॉन्ट्रेक्टर की भूमिका क्षेत्र के विकासक की तरह होती है।ऐसे में सप्लायर को कॉन्ट्रेक्टर बता कर कॉन्ट्रेक्टर को बदनाम कर उनके सारे काम रोक देना,यह गुणवत्तापूर्ण प्रशासक की निशानी नहीं।इस चक्कर में इसका असर मनपा प्रशासन को भूगतना पड़ सकता है,तब जब शहर का विकास करने की नौबत आएगी।

विडंबना यह है कि मनपा के स्वास्थ्य विभाग में सफाई कर्मियों की हज़ारी घोटाला पिछले 2 दशक से शुरू है,मनपा से मासिक वेतन जा रहा और काम निजी परिसरों का हो रहा या ठेके लिए जा रहे। सफाई कर्मियों के सरगनाओं की मनपा स्वास्थ्य विभाग जोनल प्रमुख और नगरसेवकों से गहरी सांठगांठ होने के कारण मनपा का स्वास्थ्य मामले में स्तर काफी घटता जा रहा तो दूसरी ओर मनपा खजाने को करोड़ों में चुना भी लग रहा,यह नहीं दिखा डॉक्टर चिलकर को।

डॉक्टर चिलकर को यह भी नहीं दिख रहा कि स्वास्थ्य विभाग अंतर्गत कचरा संकलन करने वाली दोनों एजेंसी के साथ हुए करार के अनुसार कितनी मशीन और कर्मी होनी चाहिए और हकीकत में कितनी हैं और भुगतान कितने का हो रहा।

इतना ही नहीं स्वास्थ्य विभाग का store संभालने वाले का काम मासिक संकलन का भी है,ये खासकर आपूर्तिकर्ता से कर रहे। इधर भी गंभीरता दिखाए अन्यथा यह सिद्ध हो जाएगा कि किसी अधिकारी/कर्मी ने डॉक्टर चिलकर की बात नहीं मानी इसलिए स्टेशनरी घोटाला सार्वजनिक किया गया।

कारखाना विभाग में घोटाला ही घोटाला
कारखाना विभाग मार्फत रोजाना ईंधन के लिए कूपन दी जाती है,इसका कोई मापदंड नहीं होता। कूपन लेने वाले पम्प से जुगाड़ कर ईंधन कम लेकर नगदी उठा रहे या फिर अन्य निजी वाहनों में ईंधन डलवा रहे।
विभाग में मनपा वाहनों की मरम्मत के लिए निजी एजेंसी को काम दिया जा रहा।वे भी भारी भरक्कम बिल थमा रहे,जिसको प्रमुखता से विभाग प्रमुख CLEAR करवा के दे रहे।

सीमेंट सड़क घोटाला पर अजीब सी चुप्पी
यह महत्वपूर्ण न होने के बावजूद जुगाड़ के तहत एक ही ठेकेदार को फेज-2 अंतर्गत सीमेंट सड़क निर्माण का ठेका दिया गया। टेंडर शर्त पूरा न करने पर वर्कऑर्डर दिया गया। और तो और JV के दूसरे पार्टनर के व्यक्तिगत कहते में करोड़ो का भुगतान किया गया। इस मामले में वित्त और लोककर्म विभाग 100% दोषी है,यह मामला लोकायुक्त तक गया,लोकायुक्त ने शिकायतकर्ता को उच्च न्यायालय में रिट याचिका दायर करने का निर्देश आयुक्त के समक्ष दिया।बावजूद इसके आयुक्त उक्त मामले को घोटाला नहीं अनियमितता बतला कर अबतक पर्दा डाले हुए है,क्या आयुक्त का दोषी ठेकेदार और दोषी अधिकारी को संरक्षण हैं।

CFC के नाम पर बेकाम कर्मी उठा रहे लाभ
CFC के नाम पर मनपा ने एक ही ठेकेदार को पिछले 2 दशक से तैनात कर भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही.इस ठेकेदार ने कभी अधिकारी तो कभी पदाधिकारी के सिफारिश पर बेकाम लोगों को कंप्यूटर ऑपरेटर के नाम पर भर्ती कर उन्हें 22 से 24 हज़ार रूपए मासिक भुगतान वर्षो से कर रही.इस क्रम में 30% ऐसे ऑपरेटर है जो जुगाड़ू हैं.वे सिर्फ बिना काम के मनपा से आर्थिक लाभ ले रही.इसकी जानकारी GAD को होने किए बावजूद आयुक्त को गुमराह कर मनपा को चुना लगाया जा रहा.क्या यह धांधली या घोटाला नहीं. इसके बावजूद GAD ने उसी ठेकेदार को टेंडर ख़त्म होने के बावजूद 2500 रूपए प्रति ऑपरेटर/प्रति माह दे रहे हैं,अर्थात मनपा में लूट जारी हैं.

जांच समिति बनाने के नाम पर नुरा-कुश्ती
जब सीमेंट सड़क घोटाला खुला और अब स्टेशनरी घोटाला,दोनों ही प्रकरण में आयुक्त और सत्तापक्ष के मध्य अधिकार को लेकर नुरा-कुश्ती देखने को मिल रही,जो मामले की गंभीरता को प्रभावित कर रही।

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