नागपुर: मोदी गुजरात के विधानसभा चुनाव को लेकर काफी सकते में हैं। लगातार चौथी बार पुनः सत्ता में आने के लिए कई सामाजिक-राजनैतिक दिक्कतें आ रही हैं। चर्चा है कि इसका रामबाण इलाज के तौर पर अप्रत्यक्ष रूप से भाजपा व एनसीपी ने संयुक्त मंत्रणा कर एनसीपी नेता को गुजरात में पटेल समुदाय का नेता घोषित कर सक्रिय कर दिया है। पटेल के सफल त्याग पर उन्हें सम्मानित किया जायेगा।
गुजरात में इसी वर्ष आखिर में विधानसभा चुनाव होने वाला है। इस चुनाव में लगातार चौथी बार जीत के लिए भाजपा काफी सकते में है। लगातार सत्ता में रहने के कारण भाजपा की कई खामियां उन पर सर चढ़ कर बोल रही है। इसके साथ भाजपा में विभिन्न गुट तैयार होने से सत्तापक्ष को नुकसान होने का संदेह है। इसके अलावा पाटीदार समाज का आंदोलन व हार्दिक पटेल जैसे युवा नेतृत्व का उभरना भाजपा के लिए कठिन साबित हो रहा है। जीएसटी को लेकर सूरत के आंदोलन ने बेड़ा मुश्किलें और बढ़ा दी थीं।
गुजरात विधानसभा चुनाव में अब तक दो ही पार्टियों के बीच मुक़ाबला हुआ करता था। वह है कांग्रेस व भाजपा। लेकिन इस बार शिवसेना ने हार्दिक पटेल को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर उसे चुनावी मैदान में उतार दिया। वहीं एनसीपी ने प्रफ्फुल पटेल को पिछले 6 माह से गुजरात में बैठाए रखा है। अर्थात एनसीपी प्रफ्फुल के कंधों पर बंदूक रख गुजरात में दूसरे क्रमांक की पार्टी बनकर पूरी ताक़त से सक्रिय हो चुकी है। पटेल के साथ पूर्व एमएलसी राजेन्द्र जैन भी अस्थाई रूप से गुजरात शिफ्ट कर चुके हैं।
लेकिन सूत्र बतलाते है कि मोदी शासन ने एनसीपी के छगन भुजबल, अजित पवार, प्रदेशाध्यक्ष सुनील तटकरे पर नकेल कस चुकी है। इसी तरह प्रफ्फुल पटेल का एयर इंडिया में गड़बड़ी का मामला सार्वजनिक न करने के बदले बड़ा समझौता किया गया है। तय समझौता के अनुसार प्रफ्फुल पटेल को हार्दिक पटेल को पछाड़ने के लिए एनसीपी की ओर से पूरी ताक़त झोंकने के निर्देश दिए गए हैं। इस चुनाव में भाजपा के खिलाफ हार्दिक पटेल को बौना करने में प्रफ्फुल पटेल को सफलता मिली तो भाजपा प्रफ्फुल पटेल को इनाम भी देंगी। गुजरात विस चुनाव में प्रफ्फुल एनसीपी की टिकट पर अपनी धर्मपत्नी को उम्मीदवार बना सकते हैं।प्रफ्फुल पटेल भाजपा के मोहरे के रूप में सक्रिय रहेंगे तो भाजपा से जुड़े कॉर्पोरेट हाउसेस चुनावी मदद करेंगे।
उल्लेखनीय यह है कि प्रफ्फुल पटेल का गोंदिया-भंडारा से लगाव का आंकलन नहीं किया जा सकता है। अगला लोकसभा चुनाव भी प्रफ्फुल गोंदिया-भंडारा से लड़ना चाहते हैं। गोंदिया-भंडारा से लोकसभा चुनाव जीतने के लिए पवार व कुनबी समाज के मत से ही लोकसभा पहुंचा जा सकता है। दोनों समाज का मत फिलहाल भाजपा के साथ है। गुजरात चुनाव में प्रफ्फुल की वजह से हार्दिक को बौना कर भाजपा को बड़ी जीत मिली तो गोंदिया-भंडारा से लोकसभा पहुंचाने में भाजपा प्रफ्फुल पटेल का साथ देगी।
गुजरात विस चुनाव में भाजपा को बहुमत नहीं मिला तो एनसीपी के साथ फिर से चौथी बार सत्ता में आ सकती है। यह भी मुमकिन है कि एनसीपी ने बड़ी जीत हासिल की तो कांग्रेस के साथ सत्ता हासिल करने का प्रयास किया जा सकता है।एनसीपी इस वक़्त गुजरात विस चुनाव को लेकर ‘चित भी मेरी, पट भी मेरी’ की तर्ज पर दोहरी कूटनीति खेल रही है।
—राजीव रंजन कुशवाहा