Published On : Wed, Nov 22nd, 2017

स्वच्छ भारत अभियान पर धब्बा नाईक तालाब

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नागपुर: शहर के प्रमुख व ऐतिहासिक जलाशयों में से एक नाईक तालाब आज अपने अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहा है. मनपा की कुनीति के कारण कभी पीने और घरेलू उपयोग के काम में भी लाए जानेवाले तालाब का पानी आज बुरी तरह प्रदूषित हो चला है. मनपा प्रशासन की पहल पर तालाब के चारों ओर वैध-अवैध बस्तियों का गंदा व मलयुक्त पानी इसी तालाब में छोड़ा जा रहा है. आलम यह है कि तालाब में जमा पानी को हिलाने या उसमें जोर से पत्थर मारने से हिलता हुआ पानी चंद सेकेंड में बदबू का अहसास करवाता है. क्या मनपा इसी बिना पर स्वच्छ भारत मिशन में खुद की पीठ थपथपाएंगी?

स्थानीय नागरिकों के अनुसार वर्ष २००० के पूर्व तक पानी साफ़ था, तब बदबू नहीं आती थी. स्थानीय शौक़ीन तैराक हो जाया करते थे. इसके बाद मनपा आदि प्रशासनों के अगुआई में आस पास के हज़ारों घरों का गंदा व मलयुक्त पानी इसी तालाब में छोड़े जाने लगी. इसी दौरान तालाब के चारों ओर सौन्दर्यीयकरण के नाम पर चार दीवारी खड़ी की गई. इससे तालाब का आकार छोटा हो गया है, जबकि पहले से ही चारदीवार ऐसी थी कि किसी भी ओर से तालाब को निहारा जा सकता था. आज आस पास के नागरिक और व्यावसायिक प्रतिष्ठान वाले रोजाना थैली के थैली कचरे इसी तालाब में फेंक प्रदूषित कर रहे हैं. गणेश विसर्जन के बाद इस तालाब से विसर्जित मलबे तक ठीक से निकाले नहीं गए. तालाब से सटे मनपा शाला का बाहरी हिस्सा जो तालाब से सटा है, यह खुली शौचालय का रूप ले चुका है. आसपास का कचरा घर भी तालाब से सटा होने से प्रदूषण और गंदगी दोगुनी हो गई है. इसके जिम्मेदार सम्बंधित विभाग के साथ स्थानीय नागरिक भी हैं, जो गंदगी करना नहीं छोड़ रहे, भले ही अस्वछता से सामना कर रहे हो. तालाब का एक कोना बुझाकर बगीचा निर्माण किया गया, जो अब कचरा जमा करने का स्थल बन चुका है. तालाब के चारों ओर पुरानी और नई चारदीवारी के बीच एवं नई चारदीवारी के बाहर अतिक्रमणकारियों ने स्थाई अतिक्रमण कर रखा है.


स्वास्थ्य विभाग खानापूर्ति में लीन
मनपा सह जिला स्वास्थ्य विभाग कभी उक्त समस्या को लेकर न उच्च स्तरीय दौरा किया और न ही मंथन कर तालाब को पुनर्जीवित करने हेतु कोई अभियान छेड़ा. रोजाना साफ़-सफाई के नाम पर मनपा स्वास्थ्य विभाग के कर्मी आते और 1-2 घंटे समय व्यतीत कर अपने-अपने गंतव्य स्थान की ओर चले जाते हैं.

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उपमहापौर पार्डीकर दिखते हैं गंभीर
नगरसेवक बनने के पहले और बाद में जब उपमहापौर बने दीपराज पार्डीकर पिछले कुछ माह से इस तालाब को पुनर्जीवित करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं. कुछ माह पूर्व तालाब में पनपे गैरजरूरत पेड़-पौधों को निकलवाए. जल स्वच्छ करने के लिए आर्ट ऑफ़ लिविंग के प्रकल्प यूनिट की मदद से प्रयोग किए गए. स्थानीय नागरिकों के अनुसार उपमहापौर की दिली इच्छा है कि उनके कार्यकाल में तालाब अपने अस्तित्व को पा लें. जिससे आसपास के नागरिकों का शहर की भीषण गर्मी में जल समस्या से निजात मिल सके.



















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