– जिम्मेदार परिवहन व्यवस्थापक को मनपा प्रशासन का शह
नागपुर: मनपा प्रशासन ,मनपा परिवहन विभाग और परिवहन समिति के मध्य दिनोंदिन दरारें पड़ती जा रही.नतीजा मनपा को प्रत्येक वर्ष करोड़ों का नुकसान सहन करना पड़ रहा और असुरक्षित परिवहन सेवा होने से आये दिन नापाक घटना घट रही,जिसका पिछले दिनों काफी चर्चे में रहा.
‘नागपुर टुडे’ में ‘लालफीताशाही के फेर में अटकी महिला स्पेशल तेजश्विनी और मिनी बस’ शीर्षक की खबर पढ़ते ही मनपा परिवहन सभापति बंटी कुकड़े ने खबर की लिंक आयुक्त अभिजीत बांगर तक पहुंचाई।इसके तुरत बाद आयुक्त से चर्चा की तो आयुक्त ने दोपहर साढ़े ३ बजे का मुलाकात सह चर्चा सहित अंतिम निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
मिनी बस और तेजश्विनी महिला स्पेशल बस की पिछले २ वर्षों से सिर्फ घोषणा करने वाले सभापति कुकड़े काफी उम्मीद आयुक्त से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। इस बैठक में सम्पूर्ण चर्चा सह कार्यवाही के लिए परिवहन व्यवस्थापक का उपस्थित होना अनिवार्य था लेकिन उन्हें जब कुकड़े ने संपर्क किया तो उनका कॉल नहीं उठाया। ऐसी सूरत में आयुक्त ने स्वतः पहल कर जगताप को अपने कक्ष में उपस्थित रहने का निर्देश नहीं दिया ,यह भी एक बड़ा सवाल हैं.
कुकड़े के अनुसार आयुक्त ने उनसे कहा कि उक्त सभी बसों के सन्दर्भ में पहले गडकरी से चर्चा करेंगे फिर निर्णय लेंगे।इससे परिवहन सभापति झल्ला गए और दोनों बसों को शुरू करने के सन्दर्भ में कई तर्क दिए लेकिन आयुक्त ने उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं दिए.जगताप भी अंत तक नहीं पहुंचा,महत्वपूर्ण बैठक असफल तो रही,ऊपर से आयुक्त ने ४ बजे आगे की कार्यवाही की जानकारी देने का आश्वासन देकर परिवहन सभापति को लौटा दिया।
झल्लाए सभापति कुकड़े ने अपने कक्ष में नागपुर टुडे प्रतिनिधि को जानकारी दी कि मनपा प्रशासन को काम करने की इच्छा नहीं,जगताप क्यूंकि राज्य परिवहन महामंडल से प्रतिनियुक्ति पर आया इसलिए उसे वहां की आदत लगी हैं.नए बसों का मनपा परिवहन सेवा में शामिल होने से उनका ‘दाना-पानी’ रुक जाएगा,इसलिए प्रशासन को गुमराह कर रहे.प्रशासन भी मनपा का नुकसान कम के उपयोजना को तहरिज देने के बजाय असक्षम जगताप को महत्त्व दे रहे.
सभापति-आयुक्त मुलाकात के कुछ मिनटों बाद जगताप आयुक्त से मिलने उनके कक्ष पहुंचे।कुकड़े का मानना हैं कि नकारात्मक भूमिका ही निभाई होंगी। आगामी ९ मार्च तक उक्त दोनों बसों के संदर्भ में मनपा प्रशासन ने ठोस निर्णय नहीं लिया तो वे सभापति कार्यालय में आना छोड़ देंगे।
कुकड़े के अनुसार महिला स्पेशल तेजश्विनी बस के लिए राज्य सरकार ने लगभग साढ़े ९ करोड़ निधि दी,इससे ५ इलेक्ट्रिक बस खरीदने हेतु टेंडर जारी हो चूका,कार्यादेश देने में आनाकानी की जा रही.कार्यादेश देने के लगभग ६ माह बाद मनपा बेड़े में पांचो इलेक्ट्रिक बस शामिल हो पाएंगी।
वही दूसरी ओर मनपा परिवहन सेवा शुरू होने के पूर्व तीनों बस ऑपरेटरों के साथ किये गए करार के अनुसार उन्हें सिर्फ मिनी बस खरीदने की अनुमति देनी हैं.तीनों ऑपरेटरों को १५-१५ मिनी बस खरीद बेड़े में शामिल करना हैं.जब वे जितने व जैसे-जैसे मिनी बस बेड़े में शामिल करते जायेंगे,वैसे-वैसे जर्जर स्टैण्डर्ड बस बेड़े से कम होती जाएंगी। आज स्टैंडर्ड बस को ५२ रूपए मनपा प्रति किलोमीटर भुगतान कर रही.इस हिसाब से कुल २३७ स्टैण्डर्ड बस तीनों ऑपरेटरों में विभक्त की गई हैं,अर्थात मनपा प्रतिदिन सिर्फ स्टैण्डर्ड बस के संचलन पर २४,६४,८०० रूपए खर्च कर रही.सालाना इन बसों पर ८८,७३,२८,००० रूपए( ३६० दिन साल के ) खर्च किये जाते हैं.जबकि इनसे कमाई आधी के आसपास होती हैं.स्टैण्डर्ड बसों में कुल ३ से ४ दर्जन खटारी हो चुकी हैं,अधिकांश स्टैण्डर्ड बसें काली धुंआ छोड़ती हैं,मजबूरन ही इसमें सफर करते देखे गए.अधिकांश आधी खाली-पीली दौड़ती नज़र आएंगी।
इसके बजाय पहले ही वर्ष में २३७ स्टैण्डर्ड बसों में से ४५ खटारी बसों को दरकिनार कर ४५ मिनी बसों को बेड़े में शामिल किया गया होता तो गली-गली सह संकरी सड़कों पर सेवाएं उपलब्ध हो गई होती।साथ में इन ४५ मिनी बसों से अबतक प्रत्येक वर्ष साढ़े ४ करोड़ से लेकर साढ़े ५ करोड़ रूपए का बचत हो गया होता और मरम्मत के नाम पर खर्च ‘शून्य’ रहा होता।
उल्लेखनीय यह हैं कि परिवहन व्यवस्थापक परिवहन समिति सह सभापति को तहरिज नहीं देते,वहीं दूसरी ओर डिम्ट्स के अधिकारियों को ‘रेड कारपेट ट्रीटमेंट’ करते देखे गए.नागपुर आने पर उनके अधिकारियों को रिसीव करते,उनके कार्यालय में मिलने जाते,उन्हें अपने वाहन से मनपा लाते और जब कभी भी डिम्ट्स पर उंगलियां उठी पुरजोर विरोध करते।सवाल यह उठता हैं कि परिवहन व्यवस्थापक मनपा के ‘पे-रोल’ पर हैं या फिर डिम्ट्स के ?