Published On : Sat, Aug 11th, 2018

कांवड़ यात्रा में क्या कर रहे थे वो दो मुस्लिम, जो पुलिस के हाथ लगे?

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दोस्तों 9 अगस्त को अपने दी लल्लनटॉप शो में हमने कांवड़ यात्रा के नाम पर होने वाली गुंडई के बारे में बताया था. लेकिन जब हम इस बारे में बता रहे थे, तो ढेर सारे लोग कॉमेंट बॉक्स में एक खबर का लिंक पेस्ट कर रहे थे. ये न्यूज़ वेबसाइट पत्रिका की खबर है, जिसके मुताबिक 8 अगस्त को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने कांवड़ मार्ग पर दो मुस्लिम लड़कों को पकड़ा, जो कांवड़ियों के भेष में घूम रहे थे. कांवड़ मार्ग आप जानते ही होंगे कि जिन रास्तों से कांवड़िए गुज़रते हैं, उसकी एक साइड पर सिर्फ कांवड़िए चलते हैं और दूसरी साइड बाकी सभी लोग.

पत्रिका की खबर के मुताबिक ओसामा और तैय्यब नाम के ये लड़के कांवड़ियों के भेष में कांवड़ रूट पर बाइक चला रहे थे. सहारनपुर में SSP आवास के पास इनकी बाइक पुलिसकर्मी रफी से टकरा गई. रफी को चोट आई. पुलिस ने दोनों को कांवड़िया समझकर रोका. पूछताछ की, तो पता चला कि दोनों मुस्लिम हैं.

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सोशल मीडिया पर कांवड़ियों की गुंडई को जस्टिफाई करने में जुटे लोग इस खबर का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं. इस खबर के ज़रिए ये लोग दावा कर रहे हैं कि कांवड़ यात्रा में उत्पात मचाने वाले हिंदू नहीं, बल्कि कांवड़ियों के भेष में घुसे मुस्लिम हैं.

10 अगस्त को हमने अपने रीडर्स को दिल्ली के मोती नगर इलाके में एक लड़की की कार पर हुए कांवड़ियों के हमले के बारे में बताया. इस मामले में अपडेट ये है कि दिल्ली पुलिस ने राहुल बिल्ला नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है, जो कार की तोड़फोड़ में शामिल था. उसका क्रिमिनल रिकॉर्ड है. वो 6-7 महीने जेल में रह चुका है और अभी ज़मानत पर बाहर है. राहुल का उस कार से एक कांवड़िये को लगी टक्कर से कोई लेनादेना नहीं था, लेकिन जब कांवड़ियों ने कार पर हमला बोल दिया, तो वो भी उनके साथ हुड़दंग में शामिल हो गया. हमारी इस खबर पर भी कई लोगों ने पत्रिका का लिंक शेयर करते हुए वही राग दोहराया.

इस मामले को जिस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है, वो देखते हुए हमने सोचा कि इसकी सच्चाई आप सभी तक पहुंचाई जाए. इसके लिए हमने सहारनपुर के जनकपुरी पुलिस थाने में बात की, जहां का ये मामला है. वहां हमारी बात इंस्पेक्टर सरिता सिंह से हुई. सरिता ने बताया कि ये मामला वैसा नहीं है, जैसा सोशल मीडिया पर चलाया जा रहा है.

सरिता ने बताया कि पकड़े गए लड़के ओसामा और तैय्यब सहारनपुर के लिंक रोड और पक्का बाग के रहने वाले हैं. इनके एक दोस्त शिवम ने भगवानपुर में कांवड़ियों के लिए शिविर लगवाया हुआ था. ये दोनों शिवम से मिलने कांवड़ियों के कैंप गए थे. जब ये वहां से लौटने लगे, तो इनके दोस्त शिवम ने इन्हें सलाह दी कि ये कांवड़ियों वाला भगवा अंगौछा गले में डाल लें. इससे पुलिस इन्हें कांवड़ियों वाले रूट पर जाने से नहीं रोकेगी और न ही चेकिंग करेगी.

जैसा हमने आपको पहले बताया, कांवड़ियों की वजह से जब रास्तों पर डाइवर्जन लगा दिया जाता है, तो शहर के लोगों को भी काफी घूम-घामकर अपनी जगह जाना पड़ता है. शिवम, ओसामा और तैय्यब, तीनों ही इस बात से वाकिफ थे. ओसामा और तैय्यब को ये दिक्कत न हो, इसलिए शिवम ने उन्हें भगवा अंगौछा दे दिया और ये लोग गागनहेड़ी रोड से लौटने लगे.

सरिता ने बताया कि एक्सीडेंट के बाद पुलिस ने दोनों को पकड़ा. पूछताछ की. फिर बाइक एक्सीडेंट के चार्ज लगाए. लेकिन जल्द ही दोनों लड़कों को छोड़ दिया गया. हमारी इस पूरी बातचीत के दौरान सरिता ने दो-तीन बार ज़ोर देकर ये बात कही कि इन दोनों लड़कों की कोई बुरी भावना नहीं थी. इन्होंने दुर्भावना या कोई अपराध करने के मकसद से भगवा अंगौछा नहीं पहना था. यही वजह थी कि पुलिस ने बिना मामला बढ़ाए इन्हें छोड़ दिया. इन दोनों लड़कों या इस मामले की कोई फोटो मीडिया में नहीं है.

तो ये इस मामले की सच्चाई है. सोशल मीडिया पर इसे जैसे दिखाया जा रहा है कि ये बहुत बड़ा अपराध हो गया या कांवड़ियों के सारे उत्पात में मुस्लिम शामिल हैं, ऐसा नहीं है. कांवड़िए क्या करते हैं, क्या-क्या करते हैं, क्यों करते हैं… ये किसी से छिपा नहीं है. कोई नहीं कह रहा है कि सारे कांवड़िए एक जैसे होते हैं. दी लल्लनटॉप की कांवड़ यात्रा में खुद मैंने देखा है कि कांवड़ यात्रा में महिलाएं आती हैं, लोग अपने बच्चों के साथ आते हैं. इनमें से कोई भी ऐसी हरकतें नहीं करता है. लेकिन अगर कोई कुछ गलत कर रहा है, तो उसे गलत कहा जाना चाहिए. फिर वो किसी भी भेष में हो और किसी भी बिरादरी से आता हो.

और आखिरी बात, ये सारी बातें पत्रिका की उस खबर में भी लिखी हैं. अंदर सारी बातें स्पष्ट की गई हैं. जो लोग वो खबर पढ़ने की सलाह दे रहे हैं, अगर उन्होंने खुद वो खबर एक बार पढ़ ली होती, तो शायद वो लोगों को इस तरह गुमराह नहीं करते.

– Lallantop

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